‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ – यानि ‘गढ़ेंगे नया छत्तीसगढ़’। ये नारा प्रदेश चुनावों में शुरु हुआ और अब भी छत्तीसगढ़ के गाँव-गाँव और शहर-शहर में छाया हुआ है। यूँ तो चुनाव के वक्त लगे नारे, चुनावों के साथ ही ख़त्म हो जाते हैं, मगर ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ तो जैसे ‘नया छत्तीसगढ़ गढ़ने’ की सोच में, नए मायनों की ऊर्जा नई सरकार के हर फ़ैसले के साथ बटोरता जा रहा है।

राजधानी रायपुर में अब नई सरकार है और वहाँ नया उत्साह भी दिख रहा है और चंद ही महीनों में नई सरकार के जोश ने असर भी दिखाया है। सुखद ये है कि तेज़ी से लिए गए कुछ बड़े फ़ैसलों का असर राजधानी रायपुर से ज़्यादा, दूर दराज़ के इलाक़ों में देखने को मिल रहा है। जहाँ आदिवासी समुदाय में खुशी की लहर है, वहीं किसानों को फ़ायदा पहुँचने लगा है।

छत्तीसगढ़ का ग्रामीण जीवन बदलने लगा है। ये बदलाव एक नई सोच - एक नई समझ के साथ आए हैं, वो सोच और समझ जो गहराई से जुड़ी है छत्तीसगढ़ की अपनी ग्रामीण परंपराओं और जीवन जीने के ढंग में... जिसे अगर समझना है तो छत्तीसगढ़ी में प्रसिद्ध य़े तीन पंक्तियों का नारा ही काफ़ी है। ये नारा या कविता छत्तीसगढ़ी ग्रामीण जीवन का आधार है और यहाँ के विकास का भी आधार बन रहा है और यही नारा नई सरकार ने भी अपनाया है। ये नारा है -

छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी

नरवा, गरुवा, घुरुवा अऊ बाड़ी

ऐला बचाना हे संगवारी

यानी छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन को संवारने के चार चिन्ह हैं - नरवा यानि पानी के स्रोत का सही इस्तेमाल, गरुवा यानि पशुधन की सही देखभाल, घुरुवा यानि उपयोग के बाद बचा कूड़ा-गोबर जिसे खाद और ऊर्जा के स्रोत के तौर पर काम में लाया जाए और अंत में बाड़ी यानि घर के आसपास सब्ज़ियों, फलों और फूलों की क्यारियाँ, जिनसे गांव के लोगों की अपनी और आसपास के लोगों की ज़रूरतें भी पूरी हो सकें।

छत्तीसगढ़ खनिज संपदा और जैविक विविधताओं से भरा है। ये इलाक़ा अपने कई आदीवासी समूहों और उनकी रंगबिरंगी संस्कृति के लिए जाना जाता है। इस इलाक़े का अनोखापन इसके घने जंगलों, झरनों, घाटियों, जंगली जानवरों और नाचते-गाते प्रकृति के साथ मिलकर जीवन बिताते यहाँ के लोग हैं। इस प्रदेश में सरकार की सक्रियता और सरकार की पहल पर लिए फ़ैसलों ने यहाँ के सरल लोगों में इस विश्वास को मज़बूत कर दिया है कि - नया छत्तीसगढ़ गढ़ा जा रहा है।

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Farmer Empowerment

कर्ज़माफ़ी से होगा 20 लाख किसानों को फ़ायदा, फ़सलों का सही मूल्य से ले कर कृषि उत्पाद पर आधारित उद्योगों की शुरुआत (लोहंडीगुड़ा, सुकमा, कोंडा गांव।

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Tribal Empowerment

तेंदूपत्ता के बेहतर रेट (2500 से 4000), बस्तर में 1700 किसानों की ज़मीन वापसी, बस्तर में फ़ूड पार्क, जेलों में बंद आदिवासियों की समीक्षा,

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